देश
में नूडल कारोबार में नेस्ले की ब्रांड मैगी सबसे आगे है. नेस्ले ने 1980 के दशक
में सबसे पहले नूडल की शुरुआत करते हुए
मैगी को भारतीय बाज़ार में उतारा था. इसके बाद से यह लगातार आजतक तक इस कारोबार में
सबसे आगे है. हालांकि पिछले 10 सालों में भारत में कई विदेशी
और घरेलू ब्रांड के नूडल लांच किए गए हैं. लेकिन आज भी मैगी के पास देश के नूडल
कारोबार सबसे बड़ा हिस्सा है. एक पीढ़ी है जिसे हम मैगी पीढ़ी कह सकते हैं. इन सब
बातों के साथ भारत विश्व में नूडल खपत में चौथा सबसे बड़ा देश भी है. जानिए नूडल
कारोबार की कुछ अहम बातें-
Ø देश के नूडल व्यवसाय में
मैगी ब्रांड की हिस्सेदारी है 70%.
Ø 4000 करोड़
रुपए का सालाना कारोबार है नूडल्स का देश में.
Ø अकेला नेस्ले का मैगी नूडल
ब्रांड 3000
करोड़ का सालाना कारोबार करता है.
Ø नेस्ले इंडिया के कुल
कारोबार के 30% हिस्से पर मैगी का कब्जा है.
Ø मैगी के बाद दूसरे नंबर पर
आईटीसी का नूडल ब्रांड सनफीस्ट यिप्पी है.
Ø मैगी के अलावा देश में
यिप्पी नूडल्स,
नॉर, चिंग्स और टॉप रैमेन भी लोकप्रिय ब्रांड
हैं.
Ø आईटीसी का यिप्पी ब्रांड
नूडल मार्केट के 20% हिस्से के साथ 800 करोड़ का कारोबार करता है.
Ø नूडल मार्केट का तीसरा
सबसे बड़ा खिलाड़ी हिंदुस्तान यूनीलीवर का ब्रांड नॉर है, जिसके पास
बाजार का 5% हिस्सा है.
Ø भारत में पिछले पांच साल
में नूडल की सेल दोगुना हुई है.
Ø चीन, इंडोनेशिया
और जापान नूडल खाने में भारत से आगे.
नेस्ले का मैगी नूडल एशियाई
देशों खासकर भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ. फिर सवाल उठता है यूरोप और
अमेरिका में क्यों नहीं? दरअसल, नेस्ले ने मैगी को
लेकर भारत में जमकर झूठ बोला, जो कि यूरोप और अमेरिका के
कड़े एडवरटाइजिंग कानूनों के चलते संभव नहीं था. जानिए, उन
तथ्यों को जो भारत में तो जमकर कारगर हो गए, जबकि ब्रिटेन और
अमेरिका जैसे देशों में नहीं.
Ø
नेस्ले ने दावा किया था कि मैगी 'मांसपेशी, हड्डी और बालों को मजबूत बनाती है'.
लेकिन ब्रिटिश एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने तुरंत आपत्ति लेते
हुए कहा कि यह दावा यूरोपियन यूनियन के कंज्यूमर प्रोटेक्शन कानून के खिलाफ है.
कंपनियों को ऐसा दावा करने से पहले हेल्थ क्लेम का प्रूफ देना होता है.
Ø
यह खुलासा तीन साल पहले भी हुआ था कि
भारत में बिकने वाले मैगी में स्वाद बढ़ाने वाला MSG (मोनो
सोडियम ग्लूकामेट) होता है. यह सोया प्रोटीन में पोरसीन एंजाइम (सुअर की आंतों से
निकालकर) मिलाकर बनता है. नेस्ले ने अपने पैक पर लिखा- 'NO MSG ADDED'. अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इस
दावे को गुमराह करने वाला बताया. क्योंकि हाइड्रोलाइज्ड प्रोटीन पकने के बाद MSG
में बदल जाता है. यह जानकारी भारत में भी थी, लेकिन
कोई कार्रवाई नहीं हुई.
Ø
MSG पर इतना हल्ला क्यों? क्योंकि
यह सबसे अनावश्यक एमीनो एसिड में से एक है. हमारा शरीर भी यह कैमिकल बनाता है,
लेकिन मैगी जैसे खाद्य पदार्थों से मिलने वाले MSG के कारण स्किन रिएक्शन, घबराहट, उल्टी, माइग्रेन, अस्थमा,
डिप्रेशन और दौरा पड़ने जैसे विकार सामने आते हैं.
क्या
नूडल्स पकाने का कोई सही तरीका भी है?
आमतौर पर हम एक बर्तन में पानी लेते हैं और उसमें नूडल्स और मसाला
डालकर पकने के लिए रख देते हैं. 3 या 3.5 मिनट
में उबल जाने के बाद हम उसे खाने लगते हैं.
नहीं, ये नूडल्स पकाने का सही तरीका नहीं
है.
इस तरह से हम मसाले में मौजूद कैमिकल को MSG के रूप में बदलने का मौका देते हैं. जो कि खतरनाक है. एक बात और है, जो शायद कम ही लोगों ने गौर की
है कि नूडल्स पर वैक्स की परत चढ़ी होती है. नूडल्स खा लेने के बाद हमें उस वैक्स
को शरीर से बाहर निकालने में 4 से 5 दिन
लग जाते हैं.
मैगी
हमारे लिए एक परफेक्ट नाश्ता रहा है. जब चाहा, जहां चाहा बना लिया.
हॉस्टल हो या कैंप, कहीं भी. यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चे
मैगी बनाते रहे हैं. और ऐसा क्यों न हो... बचपन से ही एड में सुनते आए हैं 'टेस्ट भी, हेल्थ भी'. यह तो अब
बताया जा रहा है कि सिर्फ टेस्ट है, हेल्थ तो बिलकुल नहीं
है.
बच्चों
के लिए तो यह बिलकुल सही नहीं था. खासतौर पर उनके बढ़ते दिमाग के लिए. बच्चों का
पेट भी छोटा ही होता है. ऐसे में एक पैकेट मैगी उनके लिए दिनभर के खाने का आधा
कोटा पूरा कर देती है. यदि आप बच्चों को नूडल्स खिलाना भी चाहें तो ख्याल रहे, महीने में एक-आध बार. और हां, उसमें ढेर सारी सब्जी
मिलाना न भूलें


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